
News India Live, Digital Desk : राजनीति में बयानबाजी का दौर तो चलता रहता है, लेकिन कभी-कभी कुछ दावे ऐसे होते हैं जो आम आदमी के मन में खलबली पैदा कर देते हैं। हाल ही में एक ऐसी ही चर्चा उठी कि भारत धीरे-धीरे एक ‘इस्लामिक स्टेट’ बनने की राह पर है। जैसे ही यह बात उतरी, शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने मैदान में आकर मोर्चा संभाला और इस दावे को न केवल गलत बताया, बल्कि इसे ‘पूरी तरह निराधार’ करार दिया।राजू वाघमारे का कहना है कि जब हम हकीकत और आंकड़ों को देखते हैं, तो ऐसी बातें डराने के अलावा और कुछ नहीं लगतीं। चलिए समझते हैं कि आखिर राजू वाघमारे ने ऐसा क्यों कहा और इसके पीछे का तर्क क्या है।आंकड़ों का सीधा हिसाबवाघमारे ने साफ़ शब्दों में कहा कि जिस देश की करीब85 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू हो, वहां किसी और व्यवस्था या ‘इस्लामिक स्टेट’ की कल्पना करना ही तर्कहीन है। उन्होंने समझाया कि किसी भी देश की दिशा उसकी बहुसंख्यक आबादी और उसके लोकतंत्र की जड़ों से तय होती है। भारत के पास एक ऐसा संविधान है जो सबको साथ लेकर चलता है, लेकिन यहाँ की सांस्कृतिक जड़ें हिंदुओं से जुडी हैं और इतनी बड़ी आबादी के रहते ऐसा कोई बदलाव मुमकिन नहीं है।सियासत और डराने वाली बयानबाजीआज 8 जनवरी 2026 की इस बहस में वाघमारे ने एक और अहम मुद्दा उठाया। उनका मानना है कि अक्सर नेता वोट बैंक और धु्रवीकरण (Polarization) के लिए ऐसी बातें हवा में छोड़ देते हैं ताकि लोगों के मन में डर पैदा हो। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे बयानों पर भरोसा करने के बजाय देश की मजबूती और एकता को देखें। उनका कहना है कि हिंदू समाज सजग है और भारत की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिन्हें कोई भी इस तरह से हिला नहीं सकता।विवाद क्या है?दरअसल, सोशल मीडिया और कुछ राजनैतिक मंचों पर पिछले काफी समय से यह नैरेटिव चलाने की कोशिश की जा रही थी कि जनसांख्यिकीय बदलाव की वजह से आने वाले दशकों में देश का स्वरूप बदल जाएगा। राजू वाघमारे ने इसे एक काल्पनिक डर बताया और साफ़ कहा कि ऐसे नैरेटिव सिर्फ समाज को बांटने का काम करते हैं।
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