
News India Live, Digital Desk : जब बात हमारे देश की सरहद की हो, तो ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ यानी ‘चिकन्स नेक’ (Chicken’s Neck) का नाम सुनकर किसी भी सुरक्षा विशेषज्ञ के कान खड़े हो जाते हैं। यह भारत का वह बेहद संकीर्ण रास्ता है जो बाकी देश को पूर्वोत्तर (North-East) राज्यों से जोड़ता है। आप इसे एक गले की तरह समझ सकते हैं, जिस पर दुश्मन की नज़र हमेशा टिकी रहती है।आजकल हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में जैसे हालात बने हुए हैं, उसे देखते हुए सुरक्षा का अलर्ट चरम पर है। घुसपैठ और तस्करी के खतरों को भांपते हुए बीएसएफ (BSF) ने इस संवेदनशील इलाके की सुरक्षा को अब कई गुना बढ़ा दिया है।क्या है यह नई ‘स्मार्ट फेंसिंग’?अक्सर हमने सीमाओं पर कटीली तारें देखी हैं, लेकिन इस बार मामला अलग है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर अब 12 फीट ऊंची ऐसी स्मार्ट बाड़ (Smart Fencing) लगाई गई है, जिसे पार करना तो दूर, छेड़खानी करना भी लगभग नामुमकिन है। यह सिर्फ लोहे की जाली नहीं है, बल्कि यह सेंसर्स और हाई-टेक कैमरों से लैस एक सुरक्षा तंत्र है। अगर कोई इसे काटने या फांदने की कोशिश करता है, तो तुरंत कंट्रोल रूम में सिग्नल पहुंच जाता है।अंधेरे और घने कोहरे में भी फेल नहीं होगी तकनीकपैरानी या आसपास के वो इलाके जहाँ नदियाँ हैं या झाड़ियाँ ज्यादा हैं, वहां फेंसिंग लगाना मुश्किल होता था। लेकिन नई तकनीक में थर्मल इमेजर्स का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि घने कोहरे में भी अगर कोई इंसान की परछाई हिलती दिखेगी, तो बीएसएफ के जवानों को तुरंत पता चल जाएगा।यह कदम सिर्फ बांग्लादेश के मौजूदा राजनीतिक तनाव के कारण ही नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की साजिश को रोकने के लिए उठाया गया है। भारत की इस ‘नस’ यानी चिकन्स नेक को सुरक्षित रखना इसलिए ज़रूरी है ताकि हमारे नॉर्थ-ईस्ट के भाई-बहनों का जुड़ाव बाकी भारत से हमेशा सलामत रहे। बीएसएफ की यह दीवार उन सभी लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाती है जो देश की एकता की फ़िक्र करते हैं।
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