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राज ठाकरे के लिए करो या मरो की स्थिति, क्या फिर लौटेगी मनसे की वो पुरानी धमक?:

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News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र की राजनीति की जब भी बात होती है, एक चेहरा ऐसा है जिसे अनदेखा करना नामुमकिन है वो हैं राज ठाकरे। अपनी कड़क आवाज़, सटीक अंदाज़ और ‘मराठी मानुस’ के मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाने वाले राज ठाकरे की रैलियों में लाखों की भीड़ उमड़ती है। लेकिन राजनीति का एक बहुत ही सादा और बेरहम सच ये है कि यहाँ भीड़ नहीं, वोटों की गिनती मायने रखती है।

अब 2026 में मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव आने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि ये चुनाव महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और राज ठाकरे के सियासी भविष्य के लिए सबसे अहम मोड़ साबित होने वाले हैं।

पुराना रसूख और वर्तमान का संघर्ष
अगर हम थोड़ा पीछे मुड़कर देखें, तो साल 2012 में मनसे के पास 27 से ज्यादा नगरसेवक (Corporators) थे। लेकिन पिछले चुनावों में ये ग्राफ काफी नीचे गिरा। आज सवाल ये है कि आखिर गलती कहाँ हो रही है? राज ठाकरे का करिश्मा तो बरकरार है, पर शायद संगठन के स्तर पर वैसी मजबूती नज़र नहीं आ रही जैसी कभी हुआ करती थी।

2026 का समीकरण और राज ठाकरे की रणनीति
आगामी बीएमसी चुनाव इसलिए भी दिलचस्प हैं क्योंकि शिवसेना अब दो फाड़ हो चुकी है। एक तरफ उद्धव ठाकरे (UBT) हैं और दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे (Mahayuti)। इन दो पाटों के बीच राज ठाकरे को अपनी जगह बनानी है।

  1. अमित ठाकरे की सक्रियता: इस बार राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी मैदान में डटे हुए हैं, जिससे युवा वोटर्स को साधने की कोशिश की जा रही है।
  2. महायुति के साथ ट्यूनिंग: चर्चा ये भी है कि बीजेपी और शिंदे गुट के साथ राज ठाकरे का तालमेल आने वाले दिनों में और मज़बूत हो सकता है, जिससे विरोधी वोटों का बंटवारा रोका जा सके।

मुद्दे वही, पर समय बदल गया है!
राज ठाकरे अभी भी हिंदुत्व और स्थानीय लोगों की नौकरियों की बात प्रमुखता से कर रहे हैं। मुंबई की सड़कों, गड्ढों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर उनकी बयानबाज़ी आज भी लोगों को पसंद आती है। लेकिन वोटर अब यह देख रहा है कि काम करने वाला चेहरा कौन है? क्या राज ठाकरे खुद को केवल एक ‘अपील’ करने वाले नेता से बदलकर एक ‘मैनेजमेंट’ करने वाली पार्टी के रूप में स्थापित कर पाएंगे?

जनता का मूड और निष्कर्ष
मुंबई का वोटर बहुत समझदार है। उसे मराठी गौरव भी चाहिए और साफ़-सुथरा प्रशासन भी। राज ठाकरे के पास वह विज़न तो है, पर उस विज़न को ज़मीन पर उतारने वाली टीम की कमी अक्सर खलती है। अगर 2026 में मनसे फिर से डबल डिजिट में सीटें नहीं जीत पाती, तो पार्टी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि राज ठाकरे इस बार मुंबई नगर निगम में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा पाएंगे? क्या अमित ठाकरे का चेहरा मनसे के लिए संजीवनी बूटी साबित होगा? हमें अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर बताएं।

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